अज़ान, वज़ू और मिसवाक के फज़ाइल का मुख्तसर बयान

अज़ान

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया क़यामत के दिनअज़ान देने वाले सबसे ज़्यादा लम्बी गर्दन वाले होंगे, यानी सबसे मुमताज़ नज़र आएंगे। (मुस्लिम, बाबु फज़लिल अज़ान)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया अज़ान देने वाले की आवाज़ जहां तक पहुंचती है वहां तक उसकी मगफिरत कर दी जाती है। हर जानदार और बेजान जो उसकी आवाज़ को सुनते हैंउसके लिए मगफिरत की दुआ करते हैं। (मुसनद अहमद)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया अज़ान देने वाले की की आवाज़ जो दरख्त, मिट्टी के ढेले, पत्थर, जिन और इंस सुनते हैं वह सब क़यामत के दिन अज़ान देने वाले की के लिए गवाही देंगे। (इब्ने खुज़ैमा)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जिसने बारह साल अज़ान दी उसके लिए जन्नत वाजिब हो गई, इंशा अल्लाह। (हाकिम)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया अज़ान देने वालों को क़यामत की सख्त घबराहट का खौफ नहीं होगा और न ही उनको हिसाब देना होगा, बल्कि वह मुशक के टीले पर तफरीह करेंगे।(तिर्मिज़ी, तबरानी, मजमउज़्ज़वाएद)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स अज़ान सुनने के बाद अज़ान के बाद की दुआ पढ़े तो उसके लिए क़यामत के दिन नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिफाअत वाजिब होगी। (बुखारी)

वज़ू

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जिसने अच्छी तरह वज़ू किया यानी सुन्नतों और आदाब व मुस्तहबात का एहतेमाम किया तो उसके (छोटे) गुनाह जिस्म से निकल जाते हैं, यहां तक कि उसके नाखुनों के नीचे से भी निकल जाते हैं। (मुस्लिम)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जब मोमिन बन्दा वज़ू करता है और उस दौरान कुल्ली करता है तो उसके मुंह के तमाम (छोटे) गुनाह धुल जाते हैं, जब वह नाक साफ करता है तो नाक के तमाम (छोटे) गुनाह धुल जाते हैं, जब चेहरा धोता है तो चेहरे के तमाम (छोटे) गुनाह धुल जाते हैं यहां तक कि पल्कों की जड़ों से भी निकल जाते हैं। (नसई)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया मेरी उम्मत क़यामत के दिन इस हाल में बुलाई जाएगी कि उनके हाथ पांव और चेहरे वज़ू में धुलने की वजह से रौशन और चमकदार होंगे। (बुखारी)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया मोमिन का ज़ेवर क़यामत कि दिन वहां तक पहुंचेगा जहां तक वज़ू का पानी पहुंचता है यानी आज़ा के जिन हिस्सों तक वज़ू का पानी पहुंचेगा वहां तक ज़ेवर पहनाया जाएगा। (मुस्लिम)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स मुस्तहब्बात और आदाब का एहतेमाम करते हुए अच्छी तरह वज़ू करे फिर यह दुआ पढ़े ‘‘अश हदु अन ला इलाहा आखिर तकतो उसके लिए जन्नत के आठों दरवाजें खुल जाते हैं जिससे चाहे दाखिल हो जाए। (मुस्लिम)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो शख्स वज़ू होने के बावजूद दोबारह वज़ू करता है तो उसे दस नेकियां मिलती हैं। (अबू दाउद)

(वज़ाहत) इसकी शकल यह है कि वज़ू करके मगरिब की नमाज़ मगरिब के वक़्त में अदा करली, अब इशा की नमाज़ इशा के वक़्त में अदा करनी है तो बेहतर है कि दूसरा वज़ू कर लें खाह पहला वज़ू भी बाक़ी हो।

मिसवाक

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया मिसवाक करना तमाम अम्बिया की सुन्नत है। (तिर्मिज़ी)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया मिसवाक मुंह को साफ करने वाली और अल्लाह तआला की खुशनूदी का ज़रिया है। (नसई)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया मिसवाक करके दो रिकात नमाज़ पढ़ना बेगैर मिसवाक के सत्तर रिकात पढ़ने से अफज़ल है। (रवाहुल बज़्ज़ार,मजमउज़्ज़वाएद)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया दिन या रात में जब भी नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सो कर उठते वज़ू से पहले मिसवाक ज़रूर करते। (अबू दाउद)

हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब तहज्जुद के लिए उठते तो मिसवाक से अपने मुंह को अच्छी तरह साफ करते। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम घर में तशरीफ लाने के बाद सबसे पहले मिसवाक किया करते थे। (मुस्लिम)

या अल्लाह! हम सबको क़ुरान व हदीस के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने वाला बना। या अल्लाह! हमारा खात्मा ईमान पर फरमा, आमीन।

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)