Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 23

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 28

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 34

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 38

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 45

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 49

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 58

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 62

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 71

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/ord.php on line 81

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/string/src/phputf8/utils/validation.php on line 40

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/database/driver.php on line 1946

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/database/driver.php on line 1946

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/database/driver.php on line 1946

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/database/driver.php on line 1946

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/database/driver.php on line 1946

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/database/driver.php on line 2022

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/filesystem/path.php on line 143

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/filesystem/path.php on line 146

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/joomla/filesystem/path.php on line 149

Warning: "continue" targeting switch is equivalent to "break". Did you mean to use "continue 2"? in /home/najeebqa/public_html/plugins/system/jabuilder/helper.php on line 246

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/registry/src/Format/Ini.php on line 170

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/vendor/joomla/registry/src/Format/Ini.php on line 187

Deprecated: Array and string offset access syntax with curly braces is deprecated in /home/najeebqa/public_html/libraries/src/User/UserHelper.php on line 621

Deprecated: Methods with the same name as their class will not be constructors in a future version of PHP; JAT3_AdminUtil has a deprecated constructor in /home/najeebqa/public_html/plugins/system/jat3/jat3/core/admin/util.php on line 21
ज़िक्र इलाही के लिए तसबीह या बाएं हाथ का इस्तेमाल

Deprecated: implode(): Passing glue string after array is deprecated. Swap the parameters in /home/najeebqa/public_html/plugins/content/jw_allvideos/jw_allvideos.php on line 73
Print

بِسْمِ اللهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيْم
اَلْحَمْدُ لِلّهِ رَبِّ الْعَالَمِيْن،وَالصَّلاۃ وَالسَّلامُ عَلَی النَّبِیِّ الْکَرِيم وَعَلیٰ آله وَاَصْحَابه اَجْمَعِيْن۔

ज़िक्र इलाही के लिए तसबीह या बाएं हाथ का इस्तेमाल

बहुत सी आहदीस से मालूम होता है कि शरीअते इस्लामिया में बाज़ अज़कार गिनती के साथ भी मतलूब हैं और यह तादाद मुख्तलिफ तरीक़ों से पूरी की जा सकती है मसलन सिर्फ दाएं हाथ की उंगलियों से, दोनों हाथ की उंगलियों से, कंकड़ियों से, खजूर या किसी और चीज़ की गुठली से या इसी तरह तसबीह के ज़रिये। नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ज़िक्र के लिए गिनती करने का कोई खास तरीक़ा मुअय्यन नहीं फरमाया है जैसा कि हदीस में है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने मुबारक हाथ पर तसबीह पढ़ा करते थे (तिर्मिज़ी नसई, इब्ने माजा, अबू दाऊद, मुसनद अहमद, बैहक़ी, इब्ने हिब्बान, इब्ने अबी शैबा, बज़्ज़ार, सही बुखारी) इस हदीस में दाएं या बाएं हाथ की ताईन के बेगैर बयान किया गया है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने हाथ पर तसबीह पढ़ा करते थे, अलबत्ता अबू दाऊद की एक हदीस में है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने दाएं हाथ पर तसबीह पढ़ा करते थे। यह हदीस एक सनद के अलावा बाक़ी तमाम सनदों से दाएं (यमीन) लफ्ज़ के बेगैर आई है, इसलिए अक्सर मुहद्दिसीन ने दाएं लफ्ज़ के इज़ाफे को शाज़ तसलीम किया है यानी यमीन का लफ्ज़ रावी (मोहम्मद बिन क़ुदामा) ने अपनी तरफ से बढ़ाया है। इसी तरह नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने सहाबए किराम का मुख्तलिफ चीजों पर गिनती करके ज़िक्र करना अहादीसे सहीहा से साबित है और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ज़िन्दगी में एक मरतबा भी किसी सहाबी को उंगलियों के अलावा किसी और चीज़ पर गिनती करके ज़िक्र करने से नहीं रोका।

नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दाएं या बाएं हाथ की तहदीद के बेगैर हाथ पर तसबीह पढ़ना साबित है, हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैंने नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपने हाथ मुबारक की उंगलियों पर तसबीह शुमार करते देखा। (तिर्मिज़ी)

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने औरतों को दाएं या बाएं हाथ की तहदीद के बेगैर उंगलियों पर तसबीह पढ़ने का हुकुम दिया। (तिर्मिज़ी)

उम्मुल मोमेनीन हज़रत सफिया बिन्ते हैय रज़ियल्लाहु अन्हा फरमाती है कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे पास तशरीफ लाए, मेरे पास चार हज़ार खजूर की गुठलियां रखी हुई थीं जिन पर मैं तसबीह पढ़ा करती थी। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया हैय की बेटी! यह क्या है? मैंने अर्ज़ किया इन गुठलियों पर मैं तसबीह पढ़ रही हूं। (तिर्मिज़ी)

हज़रत साद बिन अबी वक़्क़ास रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैं नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ एक सहाबिया के पास गया जिनके सामने गुठलियां या कंकड़ियां रखी हुई थीं जिन पर वह तसबीह पढ़ा करती थीं। (तिर्मिज़ी)
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु गुठलियों पर तसबीह पढ़ा करते थे। (तिर्मिज़ी)
हज़रत जुवैरिया बिन्त अल हारिस रज़ियल्लाहु अन्हा गुठलियों पर तसबीह पढ़ा करती थीं। (मुसनद अहमद, अबू दाऊद)

तसबीह के मुतअल्लिक़ मशहूर उलमाए किराम के अक़वाल
बहुत सी अहादीसे सहीहा की रौशनी में अक्सर मुहद्दिसीन, फुक़हा और उलमा की राय यही है कि अज़कार की गिनती के लिए उंगलियों के अलावा खजूर या किसी और चीज़ की गुठली या कंकड़ी या तसबीह का इस्तेमाल किया जा सकता है अगरचे उंगलियों का इस्तेमाल ज़्यादा बेहतर है, क्योंकि यह चीजें मक़सूदे इबादत नहीं हैं बल्कि इबादत का ज़रिया हैं, मसलन मसाजिद में स्पीकर का इस्तेमाल इबादते मक़सूदह नहीं हैं बल्कि इबादत इबादत के एक जुज़ के अदा करने का ज़रिया हैं, लिहाज़ा मसाजिद में स्पीकर के इस्तेमाल की तरह तसबीह का इस्तेमाल भी बिदअत नहीं है। हिन्द व पाक और बंगलादेश के जमहूर उलमा भी (जो क़ुरान व सुन्नत की रौशनी में इमाम अबू हनीफा की राय को इख्तियार करते हैं) यही फरमाते हैं कि तसबीह पर भी ज़िक्र किया जा सकता है। मशहूर मुफस्सिरे क़ुरान शैख जलालुद्दीन सुयूती मिस्री शाफइ ने अपनी किताब “अलमिनहतु फिस सुबहति” में दलाइल के साथ तसबीह पर ज़िक्र करने के जवाज पर जमहूर उलमा का मौक़िफ तहरीर फरमाया है।
सउदी अरब के मशहूर व मारूफ आलिमे दीन व साबिक़ मुफ्ती आजम शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ ने भी यही वज़ाहत की है जो उनकी वेबसाइट पर पढ़ी और सुनी जा सकती है जिसमें शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ ने तसबीह के मुतअल्लिक़ सवाल के जवाब में अर्ज़ किया तसबीह या गुठली या कंकड़ी के ज़रिया ज़िक्र करने में कोई हर्ज नहीं है। अलबत्ता उंगलियों के ज़रिये ज़िक्र करना ज़्यादा बेहतर है जैसा कि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उंगलियों के ज़रिये ज़िक्र किया, लेकिन अहादीस में आता है कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बाज़ औरतों को कंकड़ियों पर ज़िक्र करते देखा तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कुछ नहीं कहा। बाज़ नेक लोग कंकड़ियों पर तसबी पढ़ा करते थे, जबकि बाज़ दूसरे सालिहीन से दूसरी चीजों पर भी ज़िक्र करना साबित है, लिहाज़ा इस मसअला में वुसअत है (यानी तसबीह या कंकड़ी वगैरह के ज़रिया भी अल्लाह ताला का ज़िक्र किया जा सकता है) लेकिन उंगलियों पर तसबीह पढ़ना ज़्यादा बेहतर है।
नीज़ शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ ने फरमाया है कि बाएं हाथ से भी तसबीह पढ़ने की गुनजाइश है जो उनकी वेबसाइट पर पढ़ी और सुनी जा सकती है।

अल्लामा इब्ने तैमिया का भी यही क़ौल है। नीज़ फरमाया कि सहाबए किराम का कंकड़ियों पर ज़िक्र करना और नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इस पर सुकूत इख्तियार करना अहादीसे सहीहा से साबित है। अल्लामा इब्ने तैमिया ने इक़रार किया है कि बाज़ सहाबए किराम मसलन हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु कंकड़ियों पर तसबीह पढ़ा करते थे। (मजमूआ फतावा जिल्द 22 पेज 297)

नोट - सहाबी के किसी अमल पर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सुकूत इख्तियार करना भी हदीस है जो उम्मते मुस्लिमा के लिए क़ाबिले अमल है। पूरी उम्मते मुस्लिमा ने सहाबी के किसी अमल पर नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुकूत को हदीस और क़ाबिले अमल व इस्तिदलाल माना है।
सउदी अरब के मशहूर व मारूफ आलिमे दीन शैख मोहम्मद उसैमीन का भी यही क़ौल है कि तसबीह और बाएं हाथ का इस्तेमाल ज़िक्र के लिए किया जा सकता है, क्योंकि तसबीह की असल यानी सहाबए किराम का कंकड़ियों पर तसबीह पढ़ना अहादीस से साबित है, अलबत्ता उंगलियों से ज़िक्र करना बेहतर है।

सउदी अरब के एक दूसरे मशहूर व मारूफ आलिमे दीन शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन फौज़ान बिन सालह अलफौज़ान और इसी तरह शैख मोहम्मद हस्सान की भी यही राय है।

इस मौज़ू पर शैख अब्दुल फत्ताह बिन सालेह अलयाफी का तहक़ीक़ी व तफसीली मक़ाला इस लिंक पर पढ़ा जा सकता है जिसमें उन्होंने साबित किया है कि उम्मते मुस्लिमा खास कर चारों अइम्मा अहादीसे सहीहा की रौशनी में तसबीह पर ज़िक्र करने के जवाज़ के क़ायल हैं।

खुलासए कलाम
मज़कूरा अहादीसे सहीहा व मशाहिरे उलमाए किराम के अक़वाल की रौशनी में ज़िक्रे इलाही के लिए सिर्फ दाहिना हाथ या दोनों हाथ या तसबीह वगैरह का इस्तेमाल बेगैर किसी कराहियत के किया जा सकता है। अगर कोई शख्स दोनों हाथ या तसबीह के ज़रिये ज़िक्र करता है तो किसी शख्स को यह हक़ हासिल नहीं है कि वह इस अमल को बिदअत कहे या उस शख्स को उसके अमल से रोकने की कोशिश करे, क्योंकि नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कंकड़ी या गुठली वगैरह पर सहाबए किराम या सहाबियात को ज़िक्र करने से कभी नहीं रोका, इसी तरह नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम या किसी सहाबी या ताबेई या तबे ताबेई से बाएं हाथ पर ज़िक्र करने से कोई इंकार हदीस की किसी किताब में नहीं मिलता तो हमें क्या हक़ हासिल है कि हम किसी शख्स को बाएं हाथ पर या तसबीह पर ज़िक्र करने से रोकें। अगर ज़िक्र करने के लिए सिर्फ दाएं हाथ पर ही इकतिफा ज़रूरी है तो क़ुरान करीम को छूने, उसकी तबाअत और जिल्दसाज़ी के लिए, इसी तरह बैतुल्लाह का गिलाफ तैयार करने और उसको बैतुल्लाह पर चढ़ाने, नीज़ मस्जिद की तामीर और जाए नमाज़ वगैरह को तैयार करने में सिर्फ दाहिने हाथ के इस्तेमाल पर ही इकतिफा करना होगा।

मुहम्मद नजीब क़ासमी (www.najeebqasmi.com)